“पंच परमेश्वर” प्रेमचंद जी की एक अत्यंत प्रसिद्ध और लोकप्रिय कहानी है। यह कहानी न्याय, निष्पक्षता और दोस्ती पर आधारित है। यहाँ मैं आपको पूरी कहानी सरल भाषा में सुना रहा हूँ:


पंच परमेश्वर – पूरी कहानी

गाँव के दो घनिष्ठ मित्र जुम्मन शेख और आल्गू चौधरी की दोस्ती पूरे इलाके में मशहूर थी। दोनों सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देते थे। अगर किसी को जुम्मन दिखाई देता तो थोड़ी दूर पर आल्गू भी मिल जाता।

जुम्मन की बूढ़ी खाला

जुम्मन की एक बूढ़ी खाला थी। उसकी कुछ ज़मीन-जायदाद थी। उसने अपनी ज़मीन जुम्मन के नाम कर दी इस शर्त पर कि जुम्मन उम्र भर उसका पालन-पोषण करेंगे। पहले तो खाला की खूब खातिरदारी हुई। कुछ दिनों बाद जुम्मन और उसकी पत्नी का व्यवहार बदल गया। खाने-पीने में लापरवाही होने लगी और अपमान भी मिलने लगा।

खाला की गुहार

बेचारी खाला ने कई दिन तक यह सब सहा, परंतु जब असहनीय हो गया तो उसने पंचायत की मांग की। गाँव में पंचायत बैठी। किसे पंच बनाया जाए इस पर चर्चा हुई। खाला ने सबके सामने कहा – “मेरे लिए तो आल्गू चौधरी ही पंच होंगे।”

यह सुनकर जुम्मन के मन में बात खटक गई। वह समझ गया कि अब आल्गू उसके खिलाफ फैसला देंगे, परंतु बाहर से चुप रहा।

आल्गू का न्याय

पंचायत में खाला ने अपनी सारी व्यथा सुनाई। अब आल्गू के सामने बड़ी कठिनाई थी। एक तरफ वर्षों पुरानी दोस्ती थी और दूसरी तरफ न्याय। उन्होंने कुछ देर सोचने के बाद कहा –
“जुम्मन! तुम्हें खाला का पालन-पोषण करना होगा। अगर तुम्हें यह स्वीकार नहीं तो उनकी ज़मीन उन्हें लौटा दो।”

यह सुनकर जुम्मन के होश उड़ गए। वह सोच भी नहीं सकता था कि आल्गू उसके खिलाफ फैसला देंगे। उसी दिन से दोनों की मित्रता टूट गई।

समय का फेर

कुछ समय बाद आल्गू की भी एक मुकदमेबाजी आ पड़ी। एक बैल के सौदे में झगड़ा हो गया। मामला पंचायत तक पहुँचा। इस बार पंच बनाने की बारी आई तो सामने बैठे व्यक्ति ने जुम्मन का नाम लिया।

आल्गू का दिल धक से रह गया। उन्हें लगा कि जुम्मन बदला लेंगे।

जुम्मन का न्याय

पंच बनकर जुम्मन ने सोचा – “अब बदला लेने का समय है।” लेकिन जैसे ही उन्होंने पंच का आसन ग्रहण किया, उनके मन में आया कि “पंच के मन में न कोई राग रहता है, न द्वेष। पंच की जुबान पर ईश्वर का वास होता है।”

सच्चाई सुनने के बाद जुम्मन ने निष्पक्ष फैसला सुनाया –
“आल्गू का दावा सही है। बैल का दाम उसे मिलना चाहिए।”

दोस्ती की वापसी

आल्गू की आँखों में आँसू आ गए। वह दौड़कर जुम्मन से लिपट गए। दोनों की पुरानी दोस्ती लौट आई।


कहानी का संदेश

यह कहानी हमें सिखाती है कि पंच का पद सबसे ऊपर होता है। जब इंसान पंच बनता है तो उसे अपनी दोस्ती, दुश्मनी, स्वार्थ सब भुलाकर केवल न्याय और सत्य का साथ देना चाहिए।